किं बहुना तर्पणनैवेद्यपरिपूर्णं वित्तशाठ्यविरहितो यागस्थानं कुर्यात्
Transliteration (IAST)
kiṃ bahunā tarpaṇanaivedyaparipūrṇaṃ vittaśāṭhyavirahito yāgasthānaṃ kuryāt
अधिक क्या? वित्त-शाठ्य (धन की कृपणता) से रहित होकर याग-स्थान को तर्पण एवं नैवेद्य से परिपूर्ण करे।