The Essence of the Tantra· 14.8 / 29

The Essence of the Tantra14.8

14.8

ततः कुम्भे कलशे मण्डले अग्नौ स्वात्मनि च अभेदभावनया पञ्चाधिकरणम् अनुसन्धिं कुर्यात् ततः परमेश्वराद्वयरसबृंहितेन पुष्पादिना विशेषपूजां कुर्यात्

Transliteration (IAST)

tataḥ kumbhe kalaśe maṇḍale agnau svātmani ca abhedabhāvanayā pañcādhikaraṇam anusandhiṃ kuryāt tataḥ parameśvarādvayarasabṛṃhitena puṣpādinā viśeṣapūjāṃ kuryāt

— कुम्भ, कलश, मण्डल, अग्नि एवं अपने आत्मा में ; — अभेद-भावना से ; — पञ्च-अधिकरण (पाँच आधारों) का ; — अनुसन्धान करे ; — परमेश्वर-अद्वय-रस से बृंहित (समृद्ध) ; — विशेष पूजा

फिर कुम्भ, कलश, मण्डल, अग्नि एवं अपने आत्मा में अभेद-भावना से पञ्च-अधिकरण (पाँच आधारों) का अनुसन्धान करे। फिर परमेश्वर-अद्वय-रस से बृंहित पुष्प आदि से विशेष पूजा करे।