The Essence of the Tantra· 13.92 / 101

The Essence of the Tantra13.92

13.92

तदापि न उत्कर्षबुद्ध्या पश्येत्

Transliteration (IAST)

tadāpi na utkarṣabuddhyā paśyet

— तब भी ; — उत्कर्ष-बुद्धि से (श्रेष्ठता की धारणा से) ; — (उसे) न देखे

तब भी (उसे) उत्कर्ष-बुद्धि से न देखे।