The Essence of the Tantra· 13.91 / 101

The Essence of the Tantra13.91

13.91

अधोमार्गस्थितं कञ्चित् वैष्णवाद्यं तच्छास्त्रकुलात् गुरूकृत्यापि त्यजेत्

Transliteration (IAST)

adhomārgasthitaṃ kañcit vaiṣṇavādyaṃ tacchāstrakulāt gurūkṛtyāpi tyajet

— अधो-मार्ग में स्थित ; — वैष्णव आदि ; — उस शास्त्र-कुल का ; — गुरु बनाकर भी ; — त्याग दे

अधो-मार्ग में स्थित किसी वैष्णव आदि को, जो उस शास्त्र-कुल का हो, गुरु बनाकर भी त्याग दे।