The Essence of the Tantra· 13.37 / 101

The Essence of the Tantra13.37

13.37

मूलाधाराद् द्विषट्कान्तव्योमाग्रापूरणात्मिका

Transliteration (IAST)

mūlādhārād dviṣaṭkāntavyomāgrāpūraṇātmikā

— मूलाधार से ; — द्वादशान्त के व्योम-अग्र-पर्यन्त आपूरण रूप

(यह खेचरी) मूलाधार से द्विषट्क-अन्त (द्वादशान्त) के व्योम-अग्र-पर्यन्त आपूरण रूप है —