अथैकस्याधिका शक्तिर्न्यूनशक्तिनिबन्धिनी ॥२॥
athaikasyādhikā śaktirnyūnaśaktinibandhinī
(आक्षेप:) अब, एक (वस्तु) की अधिक शक्ति दूसरी की न्यून शक्ति को नियन्त्रित करती है (अतः शक्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं, सब समान शिव नहीं)।
(आक्षेप:) अब, एक (वस्तु) की अधिक शक्ति दूसरी की न्यून शक्ति को नियन्त्रित करती है (अतः शक्तियाँ भिन्न-भिन्न हैं, सब समान शिव नहीं)।