येन सा वा प्रमाणेन स्थाप्यते तस्य सत्यता ॥६८॥
yena sā vā pramāṇena sthāpyate tasya satyatā
और जिस प्रमाण से वह स्थापित की जाती है, उस (प्रमाण) की (पहले) सत्यता (सिद्ध करनी होगी)।
और जिस प्रमाण से वह स्थापित की जाती है, उस (प्रमाण) की (पहले) सत्यता (सिद्ध करनी होगी)।