Śiva Sūtras · 2.10

Śiva Sūtras 2.10

2.10
विद्यासंहारे तदुत्थस्वप्नदर्शनम् ॥१०॥
vidyā-saṃhāre tadutthа-svapna-darśanam
sūtra
— विद्या-संहार — (शुद्ध) ज्ञान के संहार/तिरोधान में (पुं. एकवचन, अधिकरण कारक, तत्पुरुष समास) ; — तदुत्थ-स्वप्न-दर्शन — उससे उत्पन्न स्वप्न का दर्शन (नपुं. एकवचन, तत्पुरुष समास)

(शुद्ध) विद्या के संहार (तिरोधान) पर उससे उत्पन्न स्वप्न का दर्शन होता है।