The Heart of Recognition · 1.19

The Heart of Recognition 1.19

1.19
समाधिसंस्कारवति व्युत्थाने भूयो भूयश्चिदैक्यामर्शान्नित्योदितसमाधिलाभः ॥१९॥
samādhi-saṃskāravati vyutthāne bhūyo bhūyaś cid-aikyāmarśān nityodita-samādhi-lābhaḥ
sūtra
— समाधि के संस्कार से युक्त दशा में ; — व्युत्थान में — समाधि से उठकर बाहरी क्रिया में आने पर ; — बार-बार ; — चित् के साथ ऐक्य के आमर्शन (विमर्श) से ; — नित्योदित समाधि — सदा उदित रहने वाली समाधि की प्राप्ति

समाधि के संस्कार से युक्त व्युत्थान-दशा में चित् के साथ ऐक्य के बार-बार आमर्शन (विमर्श) से नित्योदित समाधि की प्राप्ति होती है।