Parātrīśikā1.29
पुष्पादिकं क्रमात् सर्वं लिङ्गं वा स्थ.ङ्दिलं च वा ।
चतुर्दशाभिजप्तेन पुष्पेणासनकल्पना ॥२९॥
puṣpādikaṃ kramāt sarvaṃ liṅgaṃ vā stha.ṅdilaṃ ca vā |
caturdaśābhijaptena puṣpeṇāsanakalpanā
— पुष्प आदि — पुष्प से आरम्भ होने वाली सामग्री ; — क्रम से, यथाक्रम ; — सब, समस्त ; — लिङ्ग — प्रतीक/मूर्ति ; — अथवा ; — स्थण्डिल — वेदी-भूमि (तैयार यज्ञ-स्थल) ; — और ; — अथवा ; — चौदह बार अभिमन्त्रित ; — पुष्प से आसन की कल्पना (पुष्प + आसन-कल्पना) पुष्प आदि सब क्रम से, अथवा लिङ्ग, अथवा स्थण्डिल (वेदी-भूमि) — चौदह बार अभिमन्त्रित पुष्प से आसन की कल्पना (की जाती है)।