Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.56 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.56

18.56
सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः । मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम् ॥ १८-५६ ॥
sarvakarmāṇyapi sadā kurvāṇo madvyapāśrayaḥ | matprasādādavāpnoti śāśvataṃ padamavyayam || 18-56 ||
— समस्त कर्मों को सदा भी ; — करता हुआ, मेरा आश्रय लेने वाला ; — मेरी कृपा से प्राप्त करता है ; — शाश्वत अव्यय पद

समस्त कर्मों को सदा करता हुआ भी, मेरा आश्रय लेने वाला, मेरी कृपा से शाश्वत अव्यय पद को प्राप्त करता है।