सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः ।
मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम् ॥
१८-५६ ॥
sarvakarmāṇyapi sadā kurvāṇo madvyapāśrayaḥ |
matprasādādavāpnoti śāśvataṃ padamavyayam ||
18-56 ||
समस्त कर्मों को सदा करता हुआ भी, मेरा आश्रय लेने वाला, मेरी कृपा से शाश्वत अव्यय पद को प्राप्त करता है।