Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 15.6 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)15.6

15.6
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः । यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ १५-६ ॥
na tadbhāsayate sūryo na śaśāṅko na pāvakaḥ | yadgatvā na nivartante taddhāma paramaṃ mama || 15-6 ||
— उसे सूर्य प्रकाशित नहीं करता ; — न चन्द्रमा, न अग्नि ; — जिसमें जाकर लौटते नहीं ; — वह मेरा परम धाम

उसे न सूर्य प्रकाशित करता है, न चन्द्रमा, न अग्नि; जिसमें जाकर (मनुष्य) लौटते नहीं — वह मेरा परम धाम है।