Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 15.19 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)15.19

15.19
यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् । स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥ १५-१९ ॥
yo māmevamasammūḍho jānāti puruṣottamam | sa sarvavidbhajati māṃ sarvabhāvena bhārata || 15-19 ||
— जो मोहरहित होकर इस प्रकार मुझे ; — पुरुषोत्तम जानता है ; — वह सर्वज्ञ मुझे भजता है ; — सम्पूर्ण भाव से, हे भारत

हे भारत, जो मोहरहित होकर इस प्रकार मुझे पुरुषोत्तम जानता है, वह सर्वज्ञ पुरुष सम्पूर्ण भाव से मुझे भजता है।