The Great Liberation Tantra· 3.98 / 153

The Great Liberation Tantra3.98

3.98
कृतेनास्य फलं नास्ति नाकृतेनापि किल्विषम् । न विघ्नः प्रत्यवायो,अस्य ब्रह्ममन्त्रस्य साधनात् ॥९८॥
kṛtenāsya phalaṃ nāsti nākṛtenāpi kilviṣam | na vighnaḥ pratyavāyo,asya brahmamantrasya sādhanāt ||98||
— कर्म करने से ; — उसके लिए ; — फल ; — नहीं है ; — न करने से भी ; — कोई किल्विष ; — नहीं ; — विघ्न ; — उसके लिए प्रत्यवाय (भी नहीं) ; — ब्रह्म-मन्त्र के ; — साधन से

उसके लिए कर्म करने से (अधिक) फल नहीं, और न करने से भी कोई किल्विष (दोष) नहीं; ब्रह्म-मन्त्र के साधन से उसे न विघ्न है, न प्रत्यवाय।