The Great Liberation Tantra· 3.89 / 153

The Great Liberation Tantra3.89

3.89
जिह्वाकोटिसहस्रैस्तु वक्त्रकोटिशतैरपि । महाप्रसादमाहात्म्यं वर्णितुं नैव शक्यते ॥८९॥
jihvākoṭisahasraistu vaktrakoṭiśatairapi | mahāprasādamāhātmyaṃ varṇituṃ naiva śakyate ||89||
— हजार करोड़ जिह्वाओं से ; — सौ करोड़ मुखों से भी ; — महाप्रसाद का माहात्म्य ; — वर्णन करने में ; — नहीं ही ; — सम्भव है

हजार करोड़ जिह्वाओं और सौ करोड़ मुखों से भी महाप्रसाद का माहात्म्य वर्णित नहीं किया जा सकता।