The Great Liberation Tantra· 3.86 / 153

The Great Liberation Tantra3.86

3.86
महापातकयुक्तो वा युक्तो वाप्यन्यपातकैः । सकृत् प्रसादग्रहणात् मुच्यते नात्र संशयः ॥८६॥
mahāpātakayukto vā yukto vāpyanyapātakaiḥ | sakṛt prasādagrahaṇāt mucyate nātra saṃśayaḥ ||86||
— महापातक से युक्त ; — अथवा ; — युक्त ; — अथवा अन्य पातकों से ; — एक बार ; — प्रसाद ग्रहण करने से ; — मुक्त हो जाता है ; — इसमें नहीं ; — संशय

महापातक से युक्त हो या अन्य पातकों से युक्त — एक बार प्रसाद ग्रहण करने से वह मुक्त हो जाता है, इसमें कोई संशय नहीं।