The Great Liberation Tantra· 3.55 / 153

The Great Liberation Tantra3.55

3.55
मन्त्रेणानेन संशोध्य ध्यात्वा ब्रह्म सनातनम् । निमील्य नेत्रे मतिमानर्पयेत् परमात्मने ॥५५॥
mantreṇānena saṃśodhya dhyātvā brahma sanātanam | nimīlya netre matimānarpayet paramātmane ||55||
— इस मन्त्र से ; — शोधित करके ; — ध्यान करके ; — ब्रह्म का ; — सनातन ; — नेत्र बन्द करके ; — नेत्रों को ; — बुद्धिमान् ; — समर्पित करे ; — परमात्मा को

उन्हें इस मन्त्र से शोधित करके और सनातन ब्रह्म का ध्यान करके, बुद्धिमान् साधक नेत्र बन्द करके परमात्मा को समर्पित करे,