The Great Liberation Tantra· 3.48 / 153

The Great Liberation Tantra3.48

3.48
पुनर्दक्षिणतः कुर्यात् पूर्ववत् सुरपूजिते । प्राणायामविधिः प्रोक्तो ब्रह्ममन्त्रस्य साधने ॥४८॥
punardakṣiṇataḥ kuryāt pūrvavat surapūjite | prāṇāyāmavidhiḥ prokto brahmamantrasya sādhane ||48||
— फिर दक्षिण से ; — करे ; — पूर्ववत् ; — हे सुरपूजिते ; — प्राणायाम की विधि ; — कही गई ; — ब्रह्म-मन्त्र के ; — साधन में

हे सुरपूजिते, फिर पूर्ववत् दक्षिण से करे। इस प्रकार ब्रह्म-मन्त्र के साधन में प्राणायाम की विधि कही गई।