The Great Liberation Tantra· 3.23 / 153

The Great Liberation Tantra3.23

3.23
शृणु देवि जगद्वन्द्ये सत्यं सत्यं मयोच्यते । परब्रह्मोपासकानां किमन्यैः साधनान्तरैः ॥२३॥
śṛṇu devi jagadvandye satyaṃ satyaṃ mayocyate | parabrahmopāsakānāṃ kimanyaiḥ sādhanāntaraiḥ ||23||
— सुनो ; — हे देवि ; — हे जगद्वन्द्ये ; — सत्य ; — सत्य ; — मेरे द्वारा कहा जाता है ; — परम ब्रह्म के उपासकों को ; — अन्य से क्या ; — अन्य साधनों से

हे जगद्वन्द्ये देवि, सुनो — सत्य, सत्य मैं कहता हूँ: परम ब्रह्म के उपासकों को अन्य किन साधनों से (क्या प्रयोजन)?