The Great Liberation Tantra· 3.143 / 153

The Great Liberation Tantra3.143

3.143
अमुमेव ब्रह्ममन्त्रं मत्तः पूर्वमुपासिताः । ब्रह्मा ब्रह्मर्षयश्चापि देवा देवर्षयस्तथा ॥१४३॥
amumeva brahmamantraṃ mattaḥ pūrvamupāsitāḥ | brahmā brahmarṣayaścāpi devā devarṣayastathā ||143||
— इस ही ; — ब्रह्म-मन्त्र को ; — मुझसे ; — पूर्वकाल में ; — उपासित ; — ब्रह्मा ; — और ब्रह्मर्षि भी ; — देव ; — और देवर्षि

इस ब्रह्म-मन्त्र को मुझसे (सीखकर) पहले ब्रह्मा, ब्रह्मर्षियों, देवों और देवर्षियों ने भी उपासित किया;