The Great Liberation Tantra· 2.6 / 54

The Great Liberation Tantra2.6

2.6
मेध्यामेध्याविचाराणां न शुद्धिः श्रौतकर्मणा । न संहिताद्यैः स्मृतिभिरिष्टसिद्धिर्नृणां भवेत् ॥६॥
medhyāmedhyāvicārāṇāṃ na śuddhiḥ śrautakarmaṇā | na saṃhitādyaiḥ smṛtibhiriṣṭasiddhirnṛṇāṃ bhavet ||6||
— शुद्ध-अशुद्ध का विचार न करने वालों की ; — नहीं ; — शुद्धि ; — श्रौत कर्म से ; — नहीं ; — संहिता आदि से ; — स्मृतियों से ; — अभीष्ट की सिद्धि ; — मनुष्यों के लिए ; — हो

जो शुद्ध-अशुद्ध का विचार नहीं करते, उनकी श्रौत कर्म से शुद्धि नहीं होती; न संहिता आदि से, न स्मृतियों से मनुष्यों के अभीष्ट की सिद्धि होती है।