The Great Liberation Tantra· 2.36 / 54

The Great Liberation Tantra2.36

2.36
गूढः सर्वेषु भूतेषु सर्वव्यापी सनातनः । सर्वेन्द्रियगुणाभासः सर्वेन्द्रियविवर्जितः ॥३६॥
gūḍhaḥ sarveṣu bhūteṣu sarvavyāpī sanātanaḥ | sarvendriyaguṇābhāsaḥ sarvendriyavivarjitaḥ ||36||
— गूढ़ ; — समस्त में ; — भूतों में ; — सर्वव्यापी ; — सनातन ; — समस्त इन्द्रियों के गुणों का आभास ; — समस्त इन्द्रियों से रहित

समस्त भूतों में गूढ़, सर्वव्यापी, सनातन; समस्त इन्द्रियों के गुणों का आभास होते हुए भी समस्त इन्द्रियों से रहित;