गूढः सर्वेषु भूतेषु सर्वव्यापी सनातनः ।
सर्वेन्द्रियगुणाभासः सर्वेन्द्रियविवर्जितः ॥३६॥
gūḍhaḥ sarveṣu bhūteṣu sarvavyāpī sanātanaḥ |
sarvendriyaguṇābhāsaḥ sarvendriyavivarjitaḥ ||36||
समस्त भूतों में गूढ़, सर्वव्यापी, सनातन; समस्त इन्द्रियों के गुणों का आभास होते हुए भी समस्त इन्द्रियों से रहित;