The Great Liberation Tantra· 2.14 / 54

The Great Liberation Tantra2.14

2.14
कलौ तन्त्रोदिता मन्त्राः सिद्धास्तूर्णफलप्रदाः । शस्ताः कर्मसु सर्वेषु जपयज्ञक्रियादिषु ॥१४॥
kalau tantroditā mantrāḥ siddhāstūrṇaphalapradāḥ | śastāḥ karmasu sarveṣu japayajñakriyādiṣu ||14||
— कलियुग में ; — तन्त्र में कहे गए ; — मन्त्र ; — सिद्ध ; — शीघ्र फल देने वाले ; — प्रशस्त ; — कर्मों में ; — समस्त ; — जप, यज्ञ, क्रिया आदि में

कलियुग में तन्त्र में कहे गए मन्त्र सिद्ध और शीघ्र फल देने वाले हैं; जप, यज्ञ, क्रिया आदि समस्त कर्मों में वे प्रशस्त हैं।