The Great Liberation Tantra· 1.18 / 72

The Great Liberation Tantra1.18

1.18
श्री आद्योवाच । भगवन् सर्वभूतेश सर्वधर्मविदां वर । कृपावता भगवता ब्रह्मान्तर्यामिना पुरा ॥१८॥
śrī ādyovāca | bhagavan sarvabhūteśa sarvadharmavidāṃ vara | kṛpāvatā bhagavatā brahmāntaryāminā purā ||18||
— श्री आद्या ने कहा ; — हे भगवन् ; — हे सर्वभूतेश ; — समस्त धर्मों के ज्ञाताओं में ; — हे श्रेष्ठ ; — कृपालु के द्वारा ; — भगवान् के द्वारा ; — ब्रह्म के अन्तर्यामी के द्वारा ; — पूर्वकाल में

श्री आद्या ने कहा — हे भगवन्, हे सर्वभूतेश, हे समस्त धर्मों के ज्ञाताओं में श्रेष्ठ, पूर्वकाल में कृपालु, ब्रह्म के अन्तर्यामी भगवान् आपके द्वारा,