— बार-बार चक्कर खाकर (पुनरुक्त क्त्वान्त); — शरीर से (करण कारक); — शीघ्र, त्वरित (अव्यय); — भूमि पर गिरने से (अधिकरण + अपादान); — क्षोभ-शक्ति के विश्राम से (करण — समासगत); — परा दशा उत्पन्न होती है (कर्ता + कर्मवाच्य वर्तमान)
शरीर से बार-बार चक्कर खाकर तेज़ी से भूमि पर गिरने से, क्षोभ-शक्ति के विश्राम से (विराम लेने से) परा-दशा (परम अवस्था) उत्पन्न होती है। (धारणा ७६)