— बिन्दु-रहित (कर्म कारक); — विसर्ग-रहित (कर्म कारक); — और (अव्यय); — 'अ'-कार को (कर्म कारक); — जप करने वाले के लिए (षष्ठी एकवचन); — महान् (ज्ञान) उत्पन्न होता है (कर्ता + वर्तमान काल); — हे देवि! (सम्बोधन); — सहसा, अचानक (अव्यय); — ज्ञान-ओघ-स्वरूप परमेश्वर (कर्ता कारक — समासगत)
हे देवि! बिन्दु-रहित, विसर्ग-रहित 'अ'-कार का जप करने वाले के लिए सहसा महान् ज्ञान-ओघ-स्वरूप परमेश्वर का उदय होता है। (धारणा ५५)