yatra yatra mano yāti bāhye vābhyantare'pi vā |
tatra tatra śivāvasthā vyāpakatvāt kva yāsyati
anuṣṭubh
— जहाँ-जहाँ (अव्यय-युग्म); — मन (कर्ता कारक); — जाता है (वर्तमान काल); — बाहर (अधिकरण कारक); — अथवा (अव्यय); — भीतर (अधिकरण कारक); — अथवा भी (अव्यय-युग्म); — वहाँ-वहाँ (अव्यय-युग्म); — शिव-अवस्था (कर्ता कारक — समासगत); — व्यापकता के कारण (अपादान कारक); — कहाँ जा सकता है? (प्रश्न + भविष्यत् काल)
मन जहाँ-जहाँ जाता है — बाहर हो या भीतर — वहाँ-वहाँ शिव-अवस्था (विद्यमान) है; (शिव के) व्यापक होने से (मन) कहाँ जा सकता है? (धारणा २९)