Vijñāna Bhairava Tantra · 1.159

Vijñāna Bhairava Tantra 1.159

1.159
श्रीदेव्युवाच । देवदेव महादेव परितृप्तास्मि शङ्कर । रुद्रयामलतन्त्रस्य सारमद्यावधारितम् ॥१५९॥
śrīdevy uvāca | devadeva mahādeva paritṛptāsmi śaṅkara | rudrayāmalatantrasya sāram adyāvadhāritam
anuṣṭubh
— मैं परितृप्त हूँ — कर्ता + वर्तमान उत्तम पुरुष + विशेषण ; — रुद्रयामल (मूल तन्त्र) — षष्ठी एकवचन ; — सार अवधारित (समझा) हो गया (कर्ता + कर्मवाच्य भूत कृदन्त)

श्रीदेवी ने कहा — हे देवों के देव, महादेव शङ्कर! मैं परितृप्त हूँ; आज रुद्रयामल-तन्त्र का सार (मुझे) अवधारित हो गया।