श्रोत्रात्मनोऽसमता शक्तिश्चास्य चित्तसमता समा ।
आत्मध्यानेन या प्राप्तिः सेयं तत्त्वस्य भावना ॥१५७॥
śrotrātmano'samatā śaktiś cāsya cittasamatā samā |
ātmadhyānena yā prāptiḥ seyaṃ tattvasya bhāvanā
anuṣṭubh
श्रोता-आत्मा की असमता (असम-शक्ति) तथा इसकी चित्त-समता दोनों समान हैं; आत्म-ध्यान से जो प्राप्ति है, वही यह तत्त्व की भावना है।