Vijñāna Bhairava Tantra · 1.144

Vijñāna Bhairava Tantra 1.144

1.144
सर्वज्ञः सर्वकर्ता च व्यापकः परमेश्वरः । स एवाहं शैवधर्मा इति दार्ढ्याच्छिवो भवेत् ॥१४४॥
sarvajñaḥ sarvakartā ca vyāpakaḥ parameśvaraḥ | sa evāhaṃ śaivadharmā iti dārḍhyāc chivo bhavet
anuṣṭubh
— सर्वज्ञ, सर्वकर्ता (कर्ता कारक — समासगत) ; — शिव-धर्मा, शिव-स्वरूप (समासगत विशेषण) ; — दृढ़ता से (अपादान कारक)

[पुनरुक्ति — श्लोक ९२] 'मैं ही वह सर्वज्ञ, सर्वकर्ता, व्यापक परमेश्वर हूँ, मैं शिव-स्वरूप हूँ' — इस (भाव) की दृढ़ता से (साधक) शिव हो जाता है।