Vijñāna Bhairava Tantra · 1.136

Vijñāna Bhairava Tantra 1.136

1.136
कामक्रोधलोभमोहमदमात्सर्यगोचरे । बुद्धिं निस्तिमितां कृत्वा तत्तत्त्वमवशिष्यते ॥१३६॥
kāmakrodhalobhamohamadamātsaryagocare | buddhiṃ nistimitāṃ kṛtvā tat tattvam avaśiṣyate
anuṣṭubh
— काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य (समासगत — गोचर) ; — निस्तिमित, पूर्णतः निश्चल (विशेषण) ; — शेष रहता है, अवशिष्ट होता है (कर्मवाच्य वर्तमान)

[पुनरुक्ति — श्लोक ८४] काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद-मात्सर्य के गोचर में बुद्धि को निस्तिमित करके वह तत्त्व ही शेष रह जाता है।