कामक्रोधलोभमोहमदमात्सर्यगोचरे ।
बुद्धिं निस्तिमितां कृत्वा तत्तत्त्वमवशिष्यते ॥१३६॥
kāmakrodhalobhamohamadamātsaryagocare |
buddhiṃ nistimitāṃ kṛtvā tat tattvam avaśiṣyate
anuṣṭubh
[पुनरुक्ति — श्लोक ८४] काम-क्रोध-लोभ-मोह-मद-मात्सर्य के गोचर में बुद्धि को निस्तिमित करके वह तत्त्व ही शेष रह जाता है।