— गीत आदि विषयों के आस्वाद से उत्पन्न असम (अनुपम) सौख्य से एकात्म-स्वरूप वाले (षष्ठी — समासगत); — योगी के लिए (षष्ठी एकवचन); — तन्मयत्व के द्वारा (करण कारक); — मन की रूढ़ि (अधिरोहण) से (अपादान — समासगत); — तदात्मता, परम के साथ एकात्म्य (कर्ता कारक — समासगत)
गीत आदि विषयों के आस्वाद से उत्पन्न असम (अनुपम) सौख्य से एकात्म-रूप योगी के लिए — तन्मयत्व के द्वारा मन की रूढ़ि (अधिरोहण) से तदात्मता (परम तत्त्व के साथ एकात्म्य) हो जाती है। (धारणा ८५)