The Essence of the Tantra· 8.32 / 93

The Essence of the Tantra8.32

8.32

स च यद्य् अपि अक्रमम् एव तथापि उक्तदृशा क्रमो ऽवभासते इति

Transliteration (IAST)

sa ca yady api akramam eva tathāpi uktadṛśā kramo 'vabhāsate iti

— अक्रम — युगपत्, क्रम-रहित ; — उक्त दृष्टि से ; — क्रम — अनुक्रम ; — अवभासित होता है, प्रतीत होता है

और वह यद्यपि अक्रम (युगपत्) ही है, तथापि उक्त दृष्टि से क्रम अवभासित होता है।