The Essence of the Tantra· 6.66 / 82

The Essence of the Tantra6.66

6.66

एवं विषुवद्दिवसे तद्रात्रौ च द्वादश द्वादश सङ्क्रान्तयः

Transliteration (IAST)

evaṃ viṣuvaddivase tadrātrau ca dvādaśa dvādaśa saṅkrāntayaḥ

— विषुवत् दिवस में ; — उसकी रात्रि में ; — बारह-बारह ; — संक्रान्तियाँ

इस प्रकार विषुवत् दिवस में तथा उसकी रात्रि में बारह-बारह संक्रान्तियाँ (होती हैं)।