The Essence of the Tantra· 6.21 / 82

The Essence of the Tantra6.21

6.21

तत्र कृष्णपक्ष एव उत्तरायणं षट्सु षट्सु अङ्गुलेषु सङ्क्रान्तिः मकरात् मिथुनान्ताम्

Transliteration (IAST)

tatra kṛṣṇapakṣa eva uttarāyaṇaṃ ṣaṭsu ṣaṭsu aṅguleṣu saṅkrāntiḥ makarāt mithunāntām

— कृष्ण-पक्ष ; — उत्तरायण — सूर्य का उत्तर-गमन ; — प्रत्येक छह-छह अँगुल में ; — संक्रान्ति — सूर्य का नई राशि में प्रवेश ; — मकर से ; — मिथुन-पर्यन्त

उसमें कृष्ण-पक्ष ही उत्तरायण है: प्रत्येक छह-छह अँगुल में एक संक्रान्ति होती है, मकर से लेकर मिथुन-पर्यन्त।