The Essence of the Tantra· 5.25 / 43

The Essence of the Tantra5.25

5.25

एताश् च भूमयः त्रिकोणकन्दहृत्तालूर्ध्वकुण्डलिनीचक्रप्रवेशे भवन्ति

Transliteration (IAST)

etāś ca bhūmayaḥ trikoṇakandahṛttālūrdhvakuṇḍalinīcakrapraveśe bhavanti

— भूमियाँ — अवस्थाएँ ; — त्रिकोण, कन्द, हृदय, तालु एवं ऊर्ध्व कुण्डलिनी चक्रों में प्रवेश पर ; — होती हैं, उत्पन्न होती हैं

और ये भूमियाँ त्रिकोण, कन्द, हृदय, तालु एवं ऊर्ध्व कुण्डलिनी — इन चक्रों में प्रवेश करने पर होती हैं।