तद् एव सृष्टिसंहारबीजोच्चारणरहस्यम् अनुसन्दधत् विकल्पं संस्कुर्यात् आसु च विश्रान्तिषु प्रत्येकं पञ्च अवस्था भवन्ति प्रवेशतारतम्यात्
Transliteration (IAST)
tad eva sṛṣṭisaṃhārabījoccāraṇarahasyam anusandadhat vikalpaṃ saṃskuryāt āsu ca viśrāntiṣu pratyekaṃ pañca avasthā bhavanti praveśatāratamyāt
उसी सृष्टि-संहार के बीज-उच्चारण के रहस्य का अनुसन्धान करता हुआ (साधक) विकल्प को संस्कृत करे। और इन विश्रान्तियों में प्रत्येक में प्रवेश की तरतमता के अनुसार पाँच अवस्थाएँ होती हैं —