The Essence of the Tantra· 4.19 / 46

The Essence of the Tantra4.19

4.19

परतत्त्वे तु न किञ्चित् अपास्यम् इति उक्तम्

Transliteration (IAST)

paratattve tu na kiñcit apāsyam iti uktam

— परम तत्त्व में ; — कुछ भी अपास्य (त्याज्य) नहीं ; — कहा गया है

किन्तु परम तत्त्व में कुछ भी अपास्य (त्याज्य) नहीं है — ऐसा कहा गया।