The Essence of the Tantra· 20.16 / 65

The Essence of the Tantra20.16

20.16

इति श्लोकद्वयोक्तम् अर्थम् अन्तर् भावयन् देवताचक्रं भावयेत्

Transliteration (IAST)

iti ślokadvayoktam artham antar bhāvayan devatācakraṃ bhāvayet

— श्लोक-द्वय में कहे अर्थ को ; — अन्तर् में भावित करता हुआ ; — देवता-चक्र को भावित करे

इस श्लोक-द्वय में कहे अर्थ को अन्तर् में भावित करता हुआ देवता-चक्र को भावित करे।