The Essence of the Tantra· 16.9 / 24

The Essence of the Tantra16.9

16.9

आकृष्टाव् उद्धतौ वा मृतजनविषये कर्षणीये ऽथ जीवे योगः श्रीशम्भुनाथागमपरिगमितो जालनामा मयोक्तः

Transliteration (IAST)

ākṛṣṭāv uddhatau vā mṛtajanaviṣaye karṣaṇīye 'tha jīve yogaḥ śrīśambhunāthāgamaparigamito jālanāmā mayoktaḥ

— आकृष्ट (खींचने) में ; — उद्धत (उत्थापन) में ; — मृत-जन के विषय में ; — कर्षणीय (खींचने योग्य) जीव ; — जीव के विषय में ; — योग — यौगिक प्रक्रिया ; — श्री शम्भुनाथ के आगम से परिगमित (प्राप्त) ; — 'जाल' नामक ; — मैंने कहा

आकृष्ट अथवा उद्धत (उत्थापन) में, मृत-जन के विषय में, कर्षणीय जीव के विषय में जो योग है, वह श्री शम्भुनाथ के आगम से परिगमित (प्राप्त), 'जाल' नामक, मैंने कहा।