आकृष्टाव् उद्धतौ वा मृतजनविषये कर्षणीये ऽथ जीवे योगः श्रीशम्भुनाथागमपरिगमितो जालनामा मयोक्तः
Transliteration (IAST)
ākṛṣṭāv uddhatau vā mṛtajanaviṣaye karṣaṇīye 'tha jīve yogaḥ śrīśambhunāthāgamaparigamito jālanāmā mayoktaḥ
आकृष्ट अथवा उद्धत (उत्थापन) में, मृत-जन के विषय में, कर्षणीय जीव के विषय में जो योग है, वह श्री शम्भुनाथ के आगम से परिगमित (प्राप्त), 'जाल' नामक, मैंने कहा।