The Essence of the Tantra· 16.19 / 24

The Essence of the Tantra16.19

16.19

अधिकारिशरीरत्वात् इति मृतोद्धरणम्

Transliteration (IAST)

adhikāriśarīratvāt iti mṛtoddharaṇam

— (मनुष्य का) शरीर अधिकारी (मुक्ति-योग्य) का होने के कारण ; — मृत-उद्धरण (मृत का उद्धार, प्रकरण-समाप्ति)

क्योंकि (मनुष्य का) शरीर अधिकारी (मुक्ति-योग्य) का होता है — यह मृत-उद्धरण है।