The Essence of the Tantra· 16.18 / 24

The Essence of the Tantra16.18

16.18

मनुष्यस् तु तदैव ज्ञानं योगं दीक्षां विवेकं वा लभते

Transliteration (IAST)

manuṣyas tu tadaiva jñānaṃ yogaṃ dīkṣāṃ vivekaṃ vā labhate

— किन्तु मनुष्य ; — तभी, उसी समय ; — ज्ञान ; — योग ; — दीक्षा ; — विवेक ; — प्राप्त करता है

किन्तु मनुष्य तभी ज्ञान, योग, दीक्षा अथवा विवेक को प्राप्त करता है।