The Essence of the Tantra· 16.11 / 24

The Essence of the Tantra16.11

16.11

ततो नियतिनियन्त्रितत्वात् अभ्यासाद्यपेक्षा स्याद् एव

Transliteration (IAST)

tato niyatiniyantritatvāt abhyāsādyapekṣā syād eva

— नियति से नियन्त्रित होने के कारण ; — अभ्यास आदि की अपेक्षा ; — होती ही है

अतः नियति से नियन्त्रित होने के कारण (लौकिक प्रयोक्ता को) अभ्यास आदि की अपेक्षा होती ही है।