The Essence of the Tantra· 14.29 / 29

The Essence of the Tantra14.29

14.29

यत्र वर्तमानम् एकं वर्जयित्वा भूतं भविष्यच् च कर्म शुध्यति

Transliteration (IAST)

yatra vartamānam ekaṃ varjayitvā bhūtaṃ bhaviṣyac ca karma śudhyati

— जिसमें ; — केवल वर्तमान (कर्म) ; — छोड़कर ; — भूत एवं भविष्य ; — कर्म ; — शुद्ध होता है

जिसमें केवल वर्तमान को छोड़कर भूत एवं भविष्य कर्म शुद्ध होते हैं।