The Essence of the Tantra· 13.95 / 101

The Essence of the Tantra13.95

13.95

चक्रे स्थितश् चरमाग्र्यादिविभागं जन्मकृतं न सङ्कल्पयेत्

Transliteration (IAST)

cakre sthitaś caramāgryādivibhāgaṃ janmakṛtaṃ na saṅkalpayet

— चक्र (पवित्र मण्डल) में स्थित ; — चरम, अग्र्य आदि विभाग (अन्तिम, प्रथम आदि भेद) ; — जन्म-कृत (जन्म पर आधारित) ; — संकल्पित न करे

चक्र (पवित्र मण्डल) में स्थित होकर जन्म-कृत चरम, अग्र्य आदि विभाग को संकल्पित न करे।