The Essence of the Tantra· 13.84 / 101

The Essence of the Tantra13.84

13.84

तद्व्यतिरेकेण न अन्यत्र उत्कर्षबुद्धिं कुर्यात्

Transliteration (IAST)

tadvyatirekeṇa na anyatra utkarṣabuddhiṃ kuryāt

— उसके (गुरु एवं परम्परा के) अतिरिक्त ; — अन्यत्र नहीं ; — उत्कर्ष-बुद्धि (श्रेष्ठता की भावना) ; — न करे

उसके (गुरु एवं उसकी परम्परा के) अतिरिक्त अन्यत्र उत्कर्ष-बुद्धि न करे।