The Essence of the Tantra· 13.83 / 101

The Essence of the Tantra13.83

13.83

यत् किञ्चित् लौकिकं क्रीडादि तत् गुरुसन्निधौ न कुर्यात्

Transliteration (IAST)

yat kiñcit laukikaṃ krīḍādi tat gurusannidhau na kuryāt

— जो कुछ लौकिक ; — क्रीडा (खेल) आदि ; — गुरु की सन्निधि में ; — न करे

जो कुछ लौकिक क्रीडा आदि हो, वह गुरु की सन्निधि में न करे।