The Essence of the Tantra· 13.60 / 101

The Essence of the Tantra13.60

13.60

अर्घपात्रेण च प्रोक्षणम् एव तिलाज्यादीनां संस्कारः

Transliteration (IAST)

arghapātreṇa ca prokṣaṇam eva tilājyādīnāṃ saṃskāraḥ

— अर्घ-पात्र से ; — प्रोक्षण — छिड़काव ; — तिल, आज्य आदि का ; — संस्कार — शुद्धीकरण

और अर्घ-पात्र से प्रोक्षण ही तिल, आज्य आदि का संस्कार है।