The Essence of the Tantra· 13.4 / 101

The Essence of the Tantra13.4

13.4

तत्र यागगृहाग्रे बहिर् एव सामान्यन्यासं कुर्यात् करयोः पूर्वं ततो देहे

Transliteration (IAST)

tatra yāgagṛhāgre bahir eva sāmānyanyāsaṃ kuryāt karayoḥ pūrvaṃ tato dehe

— याग-गृह के आगे ; — बाहर ; — सामान्य न्यास (मन्त्रों का सामान्य विन्यास) ; — दोनों हाथों पर ; — देह पर

वहाँ याग-गृह के आगे, बाहर ही, सामान्य न्यास करे — पहले दोनों हाथों पर, फिर देह पर।