एवं स्वात्मसूर्यपरमेशत्रितयैकीभावनया दिक्चर्चा इति अभिनवगुप्तगुरवः
Transliteration (IAST)
evaṃ svātmasūryaparameśatritayaikībhāvanayā dikcarcā iti abhinavaguptaguravaḥ
इस प्रकार स्व-आत्मा, सूर्य एवं परमेश — इस त्रितय की एकी-भावना से दिक्-चर्चा (होती है) — ऐसा अभिनवगुप्त के गुरु (कहते हैं)।